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सोमवार, 12 अक्टूबर 2020

किसान व खेतिहर मजदूरों ने किया आंदोलन

  • वनविभाग बाघ को पकड़ नहीं सकता तो मारना चाहिए - विधायक सुभाष धोटे
  • बाघ को पकड़ने के पुरे प्रयास किये जा रहे है - उपविभागीय वन अधिकारी
प्रतिनिधि
राजुरा -
वनविभाग जिस तरह वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए प्रयास करता है, उसी तरह वन विभाग ने किसानों, खेतिहर मजदूरों के जीवन की रक्षा करने के लिए शीघ्र बाघ को पकड़ना चाहिए. नहीं पकड़ सकते तो उसे मार गिराना चाहिए. 7 दिनों में बाघ का बंदोबस्त नहीं होने पर चंद्रपुर जिलाधिकारी कार्यालय के सामने रास्ता रोको / धरना प्रदर्शन आंदोलन किया जायेगा उक्त प्रतिपादन विधायक सुभाषभाऊ धोटे ने राजुरा एंव विरुर स्टेशन वन परिक्षेत्र में बढ़ रही बाघ की दहशत को लेकर वन विभाग कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन में किया. ज्ञात हो गत एक साल में बाघ के हमलों में अबतक 10 लोगो को अपने प्राण गंवाने पड़े एंव दर्जनों लोग घायल हो गए. 

राजुरा एंव विरुर स्टेशन वन परिक्षेत्र में बढ़ रही बाघ की दहशत को लेकर वन विभाग कार्यालय के सामने रास्ता रोको आंदोलन किया जाने वाला था लेकिन पुलिस के अनुरोध पर रास्ता रोको न करते हुए धरना प्रदर्शन किया गया. धरना प्रदर्शन में शेतकरी, शेतमजुर समन्वय समिति, टेम्भुरवाही, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद की और से बाघ का शिकार बने परिजनों के नौकरी, मारे गए व्यक्ति के परिजनों को 25 लाख मुआवजा, गंभीर जख्मी होने की दशा में 15 लाख, जंगली सुवरों के आतंक से मुक्ति, जंगली जानवरों से नुकसान हुए फसल की नुकसान भरपाई के पंचनामे करने आदि विभिन्न मांगे मंजूर करने की मांग की गई. 

आंदोलनकारियों को उपविभागीय वनअधिकारी अमोल गरकल ने बतलाया की, बाघ को पकड़ने के लिए वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी मुस्तैदी से कार्य कर रहे है. साथ ही विभिन्न गांव के 200 लोग भी इसे पकड़ने के जुटे है, बाघ की पल पल की खबर रखने के लिए 160 कैमरे लगाए गए है. 3 वैद्यकीय अधिकारी तथा 2 शूटरों की सहायता ली जा रही है. आने वाले 7-8 दिनों में बाघ को पकड़ने के लिए पुरे प्रयास किये जायेंगे. इस दौरान उपविभागीय वनअधिकारी अमोल गरकल ने आंदोलनकारियों से निवेदन स्वीकारा. 

सर्वप्रथम डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा को मालार्पण कर आंदोलन की शुरुवात की गई. आंदोलनकारी पैदल वन विभाग कार्यालय के सामने पहुंचे. आंदोलन में विधायक सुभाष धोटे, पूर्व विधायक एड. संजय धोटे, पूर्व जिप सदस्य अविनाश जाधव, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के बाबूराव मडावी उपस्थित रहने से आंदोलन सर्वपक्षीय हो गया. आंदोलन में चेतन जयपुरकर, चरणदास टोडासे, स्वामी संगमवार, जीवन आमने, मल्लेश आत्राम, महिपाल मडावी, नितिन सिडाम, विनोद गेडाम, अंकुश कुलमेथे, शंकर धोंडगे, राम धुमने, अशोक अमृतकर, दीपक मडावी, अर्जुन अलगमवार उपस्थित थे.

वन विभाग की और से उपविभागीय वनअधिकारी अमोल गरकल, वनपरिक्षेत्र अधिकारी विदेशकुमार गलगट एंव अन्य वन अधिकारी तथा कर्मचारी उपस्थित थे. उपपोलिस निरीक्षक एस.जी. झुरमुरे के नेतृत्व में API गोडसे, API साखरे, मेश्राम मेजर ने पुलिस का तगड़ा बंदोबस्त था. 



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