कोयला उद्योग निजीकरण, कमर्शियल माईनिंग का विरोध
निजीकरण के विरोध में सबसे पहले बीएमएस ने उठायी थी आवाज
श्रावण कुमार - संवाददाता / अनंता गोखरे - संवाददाता (टीम )
चंद्रपुर / राजुरा -
भारत सरकार द्वारा कोयला उद्योग एवं कोल इंडिया का निजीकरण की प्रक्रिया को लागू कर रही है. जिसमें कमर्शियल माईनिंग की इजाजत दी जा रही है. सरकार के इस निर्णय के खिलाफ इंटक, भामस, आयटक, एचएमएच एवं सीटू से सम्बध्द कोल फेडरेशनों ने बुधवार को पूरे धरना प्रदर्शन एवं काली फीता लगाकर विरोध प्रकट किया. आनेवाले दिनों में सरकार के इस नीति के खिलाफ और आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है.
पांचों संगठनों की मुख्य मांगों में भारत सरकार द्वारा कोयला उद्योग का निजीकरण एवं कमर्शियल माईनिंग की घोषणा पर तत्काल रोक लगाई जाए, कोल इंडिया पर हमला करना बंद करे, सीएमपीडीआयएल को कोल इंडिया से अलग करना बंद करें, 9.3.0/9.4.0/9.5.0 को लागू करें तथा आश्रितों को बहाली उनकी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर करें, आईआई 76 को क्रियान्वयन करे, 1 जनवरी 2017 से 28 मार्च 2018 के बीच सेवानिवृत्त हुए कामगारों को 20 लाख रूपये के हिसाब से ग्रेज्युटी का भुगतान करें, ठेका मजदूरों को एचपीसी द्वारा नर्धिारित दर से मजदूरी का भुगतान करें, श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी संशोधन वापस ले, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को 7,500 रूपये प्रतिमाह की दर से अगले 6 माह तक भुगतान करें आदि मांगों का समावेश रहा. वेकोलि बल्लारपुर क्षेत्र महाप्रबंधक कार्यालय के सामने बीएमएस, एचएमएस, आयटक, आरकेकेएमएस, सीटू यूनियन की संयुक्त संघर्ष समिति ने धरना प्रदर्शन किया. जिसमें प्रमुखता से बीएमएस के अखिल भारतीय जनरल सेक्रेटरी सुधीर घुरडे, महामंत्री जोगेंद्र यादव, विवेक अल्लेवार, आर. शंकरदास, सुदर्शन डोहे, मोहनलाल, अनिल निब्रड, शांताराम वांढरे, मधुकर ठाकरे, रायलिंगु झुपाका, दिलीप कनकुलवार, अशोक चिवंडे, ताज मोहम्मद, संग्राम सिंह, रामलु तथा सैंकड़ों यूनियन सदस्य उपस्थित थे. उक्त जानकारी सुधीर घुरडे ने दी.
वेकोलि चंद्रपुर क्षेत्र में महाप्रबंधक कर्यालय के सामने आरकेकेएमएस, बीएमएस, एचएमएस, आयटक, सीटू यूनियन की संयुक्त संघर्ष समिति ने धरना प्रदर्शन किया.

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें