- प्रकरण को अलग दिशा में जाने की साजिश
- मामले को दिया जा रहा अलग रंग
- उकसाने वाली खबर न्यूज पोर्टल में डालकर मामले को राजनितिक रंग देने का प्रयास
राजुरा -
राजुरा तहसील के माथरा ग्राम में दो किसानों के बिच बरसों से कृषि विवाद चल रहा है. भुक्तभोगी किसान ने खुद पर हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करने की कोशिश की लेकिन दूसरे किसान की राजनितिक पहुंच से भुक्तभोगी किसान बेबस एंव लाचार था. ऐसे में भुक्तभोगी किसान ने अपना दुखड़ा सामाजिक कार्यकर्ता, कांग्रेस के शहर अध्यक्ष तथा युवा पत्रकार अशोक राव को सुनाया. भुक्तभोगी किसान अपना खेत दिखाने के लिए अशोक राव एंव कुछ साथियों को खेत लेकर गया. विरुद्ध दिशा के राजनितिक पहुंच वाले किसान भी खेत में आ गये. राजनितिक पहुंच वाले किसान को आता देख राजनितिक मामला न हो यह देखकर अशोक राव वहां से चले गए. लेकिन थोड़ी ही देर में उन्हें पता चला की उनके विरुद्ध में ठाणे में शिकायत दर्ज की गयी है. अशोक राव एंव अन्य लोगो पर गंभीर आरोप लगाते हुए विभिन्न धाराओं के तहत 7 जून को मामला दर्ज किया गया. हालांकि जितने गंभीर आरोप शिकायतकर्ता ने युवा पत्रकार अशोक राव के ऊपर लगाए है जिससे शिकायत पर ही सवालिया निशान खड़े हो गए है.
राजुरा तहसील के माथरा ग्राम में दो किसानों के बिच बरसों से कृषि विवाद चल रहा है. भुक्तभोगी किसान ने खुद पर हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करने की कोशिश की लेकिन दूसरे किसान की राजनितिक पहुंच से भुक्तभोगी किसान बेबस एंव लाचार था. ऐसे में भुक्तभोगी किसान ने अपना दुखड़ा सामाजिक कार्यकर्ता, कांग्रेस के शहर अध्यक्ष तथा युवा पत्रकार अशोक राव को सुनाया. भुक्तभोगी किसान अपना खेत दिखाने के लिए अशोक राव एंव कुछ साथियों को खेत लेकर गया. विरुद्ध दिशा के राजनितिक पहुंच वाले किसान भी खेत में आ गये. राजनितिक पहुंच वाले किसान को आता देख राजनितिक मामला न हो यह देखकर अशोक राव वहां से चले गए. लेकिन थोड़ी ही देर में उन्हें पता चला की उनके विरुद्ध में ठाणे में शिकायत दर्ज की गयी है. अशोक राव एंव अन्य लोगो पर गंभीर आरोप लगाते हुए विभिन्न धाराओं के तहत 7 जून को मामला दर्ज किया गया. हालांकि जितने गंभीर आरोप शिकायतकर्ता ने युवा पत्रकार अशोक राव के ऊपर लगाए है जिससे शिकायत पर ही सवालिया निशान खड़े हो गए है.
तथाकथित न्यूज पोर्टल में प्रकाशित खबरों में युवा पत्रकार अशोक राव पर संगीन आरोप लगाए गए है. जबकि अशोक राव पर मात्र एक ही राजनितिक मामला दर्ज है. वहीं दूसरी और तथाकथित पत्रकार पर नौकरी के नाम पर झांसा देकर पैसे ऐंठने, पूर्व नगराध्यक्ष के नाबालिग बेटे के साथ मारपीट में लिप्त होने के गंभीर आरोप लग चुके है.
मामले को दिया जा रहा अलग रंग
दो किसानों के बिच बरसों से कृषि विवाद था. अशोक राव पर मामला भी दर्ज हो गया, यहां तक सब ठीक था. मामले के 5 दिन बाद 11 जून को अचानक एक न्यूज पोर्टल में "देडफूट्या ला वाचविण्यासाठी वास्तव चा खलनायक एस.पी.दरबारात" शीर्षक के तहत न्यूज चलायी गयी. जिसमें पत्रकारिता के मापदंडों को रौंदा गया. जिस मामले से नगराध्यक्ष अरुण धोटे इनका कोई लेना देना नहीं इशारों ही इशारों पर उन्हें निशाना बनाया गया. इस तरह की घटिया न्यूज क्यों लिखी? पत्रकारिता के मापदंडों के दायरे में रहकर शब्दप्रयोग क्यों नहीं किये गये? आदि पूछने पर नौसिखिये पत्रकार आदित्य भाके ने जेष्ठ पत्रकार की और उंगली उठायी. नगराध्यक्ष अरुण धोटे ने जेष्ठ पत्रकार से इस संदर्भ में पूछा तो जेष्ठ पत्रकार, नौसिखिये पत्रकार आदित्य भाके को लेकर नगराध्यक्ष अरुण धोटे के यहां लेकर आये. नगराध्यक्ष अरुण धोटे ने आत्मीयता से दोनों का कुशलक्षेम जाना एंव नौसिखिये पत्रकार आदित्य भाके को पत्रकारिता के मापदंडों के दायरे में रहकर न्यूज लिखने की सलाह दी. वहां से जाते ही रंग बदलने में माहिर नौसिखिये पत्रकार आदित्य भाके ने नगराध्यक्ष पर ही जान से मारने का आरोप मढ दिया. मामला राजुरा का रहने के बावजूद राजुरा में सभी अख़बारों, न्यूज चॅनेल तथा न्यूज पोर्टल के पत्रकार रहने के बावजूद चंद्रपुर में पत्रकार परिषद लेकर मामले को अलग राजनितिक रंग देने की कोशिश तो नहीं की जा रही है ऐसी आशंका व्यक्त की जा रही है.
आज फिर इस तथाकथित न्यूज पोर्टल पर "पत्रकार को धमकी दी, निषेध" आदि खबरें चल रही है. जिस न्यूज पोर्टल में लगातार राजनितिक द्वेष के चलते राजुरा के प्रथम नागरिक के विरुद्ध में खबरें चल रही है उसके संपादक को भी पत्रकारिता का अधिक अनुभव नहीं है. मात्र 7-8 माह पूर्व चंद्रपुर के एक न्यूज पोर्टल में ऑपरेटर का कार्य करने वाला यह शख्स संपादक बनकर बरसों से पत्रकारिता कर रहे पत्रकारों को नसीहत देने की खबरें चला रहा है. अपने पत्रकार की कारगुजरियों से अनभिज्ञ न्यूज पोर्टल अपने पत्रकार के अतीत में झांककर उनके कारनामों का पता लगाने की मांग राजुरा के सुज्ञ नागरिक कर रहे है.



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