- झंवर परिवार द्वारा स्थापित गणेशजी की सजावट बनी आकर्षण का केंद्र
- परिवार के सदस्योंने स्वयं बनाई तिरुपति बालाजी की आकर्षक मूर्ति
- स्वयं की आकर्षक सजावट ; प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु ले रहे दर्शन का लाभ
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धार्मिक कार्यों में बढ़चढ़कर हिस्सा लेने वाले प्रतिष्ठित व्यवसायी नारायणप्रसादजी झंवर के घर में स्थापित गणेशजी और बालाजी की आकर्षक मूर्तियाँ और सजावट शहर में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. गणेशजी और बालाजी के दर्शन के लिए हर दिन सैकड़ों श्रद्धालु आ रहे है और आकर्षक सजावट देखकर मंत्रमुग्ध हो रहे है. कोरोना की पार्श्वभूमि पर पिछले दो साल से सार्वजनिक गणेश महोत्सव में कमी के बावजूद यह सजावट और भीड़ यह बया कराती है की भक्तों के उत्साह में मात्र कोई कमी नहीं आयी है. वर्ष 2013 से ही प्रतिष्ठित व्यवसायी झंवर परिवार के छोटे बड़े सभी सदस्य मिलकर प्रतिवर्ष आकर्षक सजावट एंव दृश्य बनाते आ रहे हैं.
गणेश चतुर्थी के दो-तीन माह पूर्व से ही दिन भर दुकानमें फिर प्रतिदिन रात्रि 9 बजे से प्रातः 3 या 4 बजे तक मूर्तियों एवं आकर्षक सजावट में परिवार के सदस्य लगे रहते हैं. इसपर से परिवार के सदस्यों का नियोजन, प्रबंधन और संयुक्त परिवार के लिए पूरकता की भावना समझी जा सकती है.
इस साल गोपाल, गजेंद्र, श्याम, पंकज और परिवार की नारीशक्ति ने मिलकर अपनी कल्पकता से बालाजी की मूर्ति बनायीं बालाजी की मूर्ति को पिस्ता, राजमा, कवडी एंव मोतियों से सजाया गया है जिस वजह से बालाजी की प्रतिमा बखूबी तिरुपति बालाजी के प्रतिमा जैसी दिखाई दे रही है. इसके लिए आकर्षक विद्युत् रोशनाई की गई है. दर्शन के लिए हर दिन सैकड़ों श्रद्धालु आ रहे है और परिवार के सदस्य श्रद्धालुओंका उसी गर्मजोशी से स्वागत भी कर रहे हैं. ईश्वर के प्रति इस परिवार की सदभावना दूसरों को भी प्रेरणा दे रही है.









